हे प्रभु !
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
अवाक् सा देखता हूँ
आप नदिया को बहाते हो जब
जब हवा को उड़ाते हो
फूलों को खिलाते हो जब ,
सब कुछ मनोहारी और
अतुलनीय है ,
यह आपका
उपकार है धरा पर ,
आप कभी भी
हांकते नहीं डींग निज
कार्यों की ,
सदा चुप्प रहते हो
चुप्प रहकर ही करते हो
समस्त कार्य ,
यह आपकी श्रेष्ठ
विनम्रता है जिसका
अनुसरण कर सकूँ मैं
ऐसी मति देना
हे प्रभु ! हे प्रभु !!