Tuesday, 29 January 2013

ऐसी मति देना ...

हे प्रभु !


अवाक् सा देखता हूँ 
आप नदिया को बहाते हो जब 
जब हवा को उड़ाते हो 
फूलों को खिलाते हो जब ,

सब कुछ मनोहारी और  
अतुलनीय है ,
यह आपका 
उपकार है धरा पर ,

आप कभी भी 
हांकते नहीं डींग निज 
कार्यों की ,

सदा चुप्प रहते हो 
चुप्प रहकर ही करते हो 
समस्त कार्य ,

यह आपकी श्रेष्ठ 
विनम्रता है जिसका 
अनुसरण कर सकूँ मैं 
ऐसी मति देना 

हे प्रभु !  हे प्रभु !!

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