हे प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है।
जब चिड़िया चहचहाती है
जब नदिया गीत गाती है।
जब फूल खिलखिलाते है ,
जब तारे जगमगाते है।
जब मैया चुंबन लेती है ,
प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है।
जब वर्षा रिमझिम आती है
जब सुबह जगमगाती है।
जब साँझ में सूरज जाता है ,
जब दिन--रात बन जाता है।
जब मुर्गी अंडों को सेती है ,
प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है।
Very Nice Sir Ji
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