Wednesday, 21 May 2014

हे प्रभु ! आपकी पदचाप सुनाई देती है।





हे प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है। 

जब चिड़िया चहचहाती है 
जब नदिया गीत गाती है। 

जब फूल खिलखिलाते है ,
जब तारे जगमगाते  है। 

जब मैया चुंबन लेती है ,

प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है। 

जब वर्षा रिमझिम आती है 
जब सुबह जगमगाती  है। 

जब साँझ में  सूरज जाता है ,
जब दिन--रात बन जाता है। 

जब मुर्गी अंडों को सेती है ,

प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है।

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