Tuesday, 27 May 2014

आपकी भूमिका ...

हे प्रभु !

आपका आभास, आपकी निकटता 
उन सभी  असंभव कृत्यों में देख सका 
जो आपने मुझसे कराये।  

अन्यथा अशक्त और असहाय होकर 
जीवन का भार उठाना 
मेरे लिए कब संभव था ?

कब संभव था संसार की नदी में 
गोता  लगाना 
यदि न होता आपका आशीष मेरे साथ। 

जो ... शेष बचा है 
उसमें भी आपकी भूमिका 
अपेक्षित है 

प्रार्थित है

हे प्रभु! हे प्रभु !!

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