Sunday, 1 June 2014

आपके अप्रतिम सामर्थ्य को ...

हे प्रभु !

आप तो सृष्टा हो,
बनाये आपने बादल ,

धरा और आकाश आपने ही बनाया 
बनाया सूरज 
चाँद भी बनाया ,

लिखा हम सब का प्रारब्ध भी आपने 
प्रभु !

सब कुछ तो हुआ है आपके ही 
कर कमलों से ,

इन्हीं कर कमलों से ही तो 
बनी  है हम सबकी काया भी। 

आपके अप्रतिम सामर्थ्य को 
शीश झुका - करता नमन ,
मैं बारम्बार ,बारम्बार 

हे प्रभु ! हे प्रभु !!

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