Sunday, 22 June 2014

इसी सिद्धांत पर..




हे प्रभु  !

आप नदी को बनाते हो 
मीलों बहाते हो ,

उसे यहाँ से वहां, वहां से 
यहाँ घुमाते  हो ,

एक दिन नदी को समुद्र से 
मिलाते हो। 

समुद्र के जल से भाप बनाकर  
बादल बनाते हो ,
बादलों से वर्षा कराते  हो ,

वर्षा के पानी से 

एक नयी नदी बनाते हो, 
उसे फिर से मीलों -
बहाते हो ,

कदाचित इसी 

सिद्धांत पर आप
पूरी सृष्टि को चलाते हो. 

हे प्रभु ! हे प्रभु !!



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