हे प्रभु !
आप नदी को बनाते हो
मीलों बहाते हो ,
उसे यहाँ से वहां, वहां से
यहाँ घुमाते हो ,
एक दिन नदी को समुद्र से
मिलाते हो।
समुद्र के जल से भाप बनाकर
बादल बनाते हो ,
बादलों से वर्षा कराते हो ,
वर्षा के पानी से
एक नयी नदी बनाते हो,
उसे फिर से मीलों -
बहाते हो ,
कदाचित इसी
सिद्धांत पर आप
पूरी सृष्टि को चलाते हो.
हे प्रभु ! हे प्रभु !!

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