हे प्रभु !

अपना रथ चलाओ होकर उदार
करो इच्छाओं की पूर्ति
योजनाओं के बनो कर्णधार
अन्यथा, निरीह मनुष्य
कहाँ खड़ा हो सकता है जीवन के युद्ध में
जहाँ शत्रु के रूप में सामने
होता है प्रारब्ध, और नियति
विजय का मार्ग कौन
प्रशस्त करेगा अतिरिक्त आपके। ?
यह नियति यह प्रारब्ध
आपके ही अनुचर हैं
कृपया सुनो पुकार
अपना रथ चलाओ होकर उदार
करो इच्छाओं की पूर्ति
योजनाओं के बनो कर्णधार
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
अपना रथ चलाओ होकर उदार
करो इच्छाओं की पूर्ति
योजनाओं के बनो कर्णधार
अन्यथा, निरीह मनुष्य
कहाँ खड़ा हो सकता है जीवन के युद्ध में
जहाँ शत्रु के रूप में सामने
होता है प्रारब्ध, और नियति
विजय का मार्ग कौन
प्रशस्त करेगा अतिरिक्त आपके। ?
यह नियति यह प्रारब्ध
आपके ही अनुचर हैं
कृपया सुनो पुकार
अपना रथ चलाओ होकर उदार
करो इच्छाओं की पूर्ति
योजनाओं के बनो कर्णधार
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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