Tuesday, 24 June 2014

सुनो पुकार..

हे प्रभु !
hanuman
अपना रथ चलाओ  होकर उदार
करो इच्छाओं की पूर्ति
योजनाओं के बनो कर्णधार

अन्यथा, निरीह मनुष्य
कहाँ खड़ा हो सकता है जीवन के युद्ध में

जहाँ शत्रु के रूप में सामने
होता है प्रारब्ध, और नियति

विजय का मार्ग कौन
प्रशस्त करेगा अतिरिक्त आपके। ?

यह नियति यह प्रारब्ध
आपके ही अनुचर हैं

कृपया सुनो पुकार
अपना रथ चलाओ  होकर उदार
करो इच्छाओं की पूर्ति
योजनाओं के बनो कर्णधार

हे  प्रभु  ! हे प्रभु !!

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