Sunday, 15 June 2014

परम पिता...

हे प्रभु !

आप शाश्वत हैं , कालजयी हैं, अनंत हैं 
इसलिए भ्रम  होता है कि 
आपकी सृष्टि दुरूह है ,अनबूझ है 
ऐसा केवल भ्रम होता है . 

जबकि आप सरस हो 
नदी की बहती जलधारा के समान ,

आप सरल हो जैसे 
एक नवजात बच्चे की मुस्कान।  

आप हो सनातन ,जीवन के रचयिता हो -
हमें  प्राण देने वाले परमेश्वर हो,परम पिता  हो।  

हे प्रभु ! हे प्रभु !!

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