हे प्रभु ! कभी कभी मुझे लगता है मैं एक बड़ा सा पेड़ हूँ
मेरे विचार, पक्षी हैं जो इस पेड़ पर घोंसला बनाकर रहते हैं , ये पक्षी रोज सुबह उड़ जाते है , पता नहीं - कहाँ कहाँ भटकते हैं साँझ होने पर फिर इसी घोंसले में आकर सो जातें हैं। कभी कभी मुझे लगता है मैं एक बड़ा सा पेड़ हूँ हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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