Saturday, 28 June 2014

कभी कभी..


हे प्रभु !

कभी कभी मुझे लगता है 
मैं एक बड़ा सा पेड़ हूँ








मेरे विचार, पक्षी हैं 
जो इस पेड़ पर घोंसला 
बनाकर रहते हैं ,

ये पक्षी रोज सुबह 
उड़ जाते है ,


पता नहीं -
कहाँ कहाँ भटकते हैं


साँझ  होने पर फिर 
इसी घोंसले  में आकर 
सो जातें हैं।  


कभी कभी मुझे लगता है 
मैं एक बड़ा सा पेड़ हूँ

हे प्रभु ! हे प्रभु  !!

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