प्रभुदयाल खट्टर की कवितायेँ
Tuesday, 1 July 2014
संरक्षक...
हे प्रभु !
भीड़ में बच्चे गुम
हो जाते हैं
इसीलिये संरक्षक की
ऊँगली पकड़ना होता है
अनिवार्य,
तब, कृपया आप
अन्यथा न लें -
जो नहीं छोड़ पा रहा मैं
ऊँगली आपकी ,
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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