Saturday, 5 July 2014

अबोध बच्चे ...



हे प्रभु !


आपने ऊँगली को 

मेरे थामा -
इस विराट यात्रा में ,

किन्तु आप जब 

इधर जाते हो 
मैं तब उधर जाता हूँ ,

आप जब उधर 

जाते हो 
मैं तब इधर आता  हूँ ,

अर्थात जो मार्ग 

आपका है ,मैं- उस मार्ग के 
विपरीत जाता  हूँ 

कदाचित !

ऐसा ही करतें हैं सभी 
अबोध बच्चे 

हे प्रभु  हे प्रभु !!

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