हे प्रभु !
आपने ऊँगली को
मेरे थामा -
इस विराट यात्रा में ,
किन्तु आप जब
इधर जाते हो
मैं तब उधर जाता हूँ ,
आप जब उधर
जाते हो
मैं तब इधर आता हूँ ,
अर्थात जो मार्ग
आपका है ,मैं- उस मार्ग के
विपरीत जाता हूँ
कदाचित !
ऐसा ही करतें हैं सभी
अबोध बच्चे
हे प्रभु हे प्रभु !!
No comments:
Post a Comment