हे प्रभु !
एक पत्ता नदी में
बहने लगे
तो क्या वह तैराक कहलाता है ?
एक तिनका आंधी में
उड़ने लगे
तो क्या वह उड़ाक कहलाता है ?
नहीं कदापि
नहीं ,
तब, आप की कृपा से-
यदि मैँ सीख गया हूँ दो चार बातें
करना ,
तब, कैसे मैं मान लूँ कि
मैं विद्वान हूँ, मैं महान हूँ ?
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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