Thursday, 3 July 2014

मैं...



हे प्रभु !

एक पत्ता नदी में 
बहने लगे 
तो क्या वह तैराक कहलाता है ?

एक तिनका आंधी में 
उड़ने लगे 
तो क्या वह उड़ाक कहलाता है ?

नहीं कदापि 
नहीं ,

तब, आप की कृपा से-
यदि मैँ सीख गया हूँ दो चार बातें 
करना ,

तब, कैसे मैं मान लूँ कि  
मैं विद्वान हूँ, मैं महान हूँ ?

हे प्रभु ! हे प्रभु !!

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