हे प्रभु !
आपका नाम लेकर भी
पग- ठोकर खाने से बाज नहीं आते ,
नहीं होता नियंत्रण, अनुशासन
आपकी स्मृति से भी ,
होता है विद्रोह आपके मार्ग को छोड़
देने के लिए ,
मन की इस शोचनीय अवस्था के साथ
उपस्थित हूँ ,
दया करो, ठीक करो मेरे दोषों को ,
मुझमें नहीं और क्षमता
स्वयं को निर्मल रख सकने की ,
आपका नाम लेकर भी
पग- ठोकर खाने से बाज नहीं आते ,
नहीं होता नियंत्रण, अनुशासन
आपकी स्मृति से भी ,
होता है विद्रोह आपके मार्ग को छोड़
देने के लिए ,
मन की इस शोचनीय अवस्था के साथ
उपस्थित हूँ ,
दया करो, ठीक करो मेरे दोषों को ,
मुझमें नहीं और क्षमता
स्वयं को निर्मल रख सकने की ,
हे प्रभु ! हे प्रभु!!
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