आपकी मुक्त हंसी तो ...
हे प्रभु !
इंन्द्रधनुषी तितली को
देखा तो विचार आया , इसे
आपने कैसे बनाया ?
इतनी सुन्दर ,
इतनी मोहक,
आपकी किसी
स्मित मुस्कान ने तो नहीं ले लिया
तितली का रूप ,
यदि यह सत्य है
तो, आपकी मुक्त हंसी तो
मंत्रमुघ्ध करती होगी।
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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