Friday, 13 June 2014

अबोध बालक...

हे प्रभु !

आपकी लीला का मूक दर्शक 
बन कर खड़ा हूँ 
एक अबोध बालक के समान ,

जिज्ञासा से भरा हुआ 
मात्र घटनाओं का साक्षी बन ,

मात्र अनुमानों की नदी में 
गोता लगाता 
मात्र ये सोचता कि 

इसका अर्थ यह है 
उसका अर्थ वह है 

हे प्रभु ! हे प्रभु !!

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