हे प्रभु !
पक्षी आकाश में दिन भर उड़ता है
नीचे आ जाता है ,
आराम करता है फिर उड़ जाता है
आकाश की ओर ,
बार बार क्यों उड़ता है वो
ऊपर की ओर ?,
जबकि ऊपर न दाना है
न पानी है ,
कदाचित
उसे यह ज्ञात तो नहीं ?
कि ऊपर ही है सबको
दाना-पानी देने वाला
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
पक्षी आकाश में दिन भर उड़ता है
नीचे आ जाता है ,
आराम करता है फिर उड़ जाता है
आकाश की ओर ,
बार बार क्यों उड़ता है वो
ऊपर की ओर ?,
जबकि ऊपर न दाना है
न पानी है ,
कदाचित
उसे यह ज्ञात तो नहीं ?
कि ऊपर ही है सबको
दाना-पानी देने वाला
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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