Friday, 6 June 2014

कदाचित ...

हे प्रभु !

पक्षी आकाश में दिन भर उड़ता है 
नीचे आ जाता है ,

आराम करता है फिर  उड़ जाता है 
आकाश की ओर ,

बार बार क्यों उड़ता है वो
ऊपर की ओर ?,

जबकि ऊपर न दाना है 
न पानी है ,

कदाचित 
उसे यह ज्ञात तो नहीं ? 

कि ऊपर ही है सबको 
दाना-पानी देने वाला 

 हे प्रभु ! हे प्रभु !!

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