प्रभुदयाल खट्टर की कवितायेँ
Sunday, 27 January 2013
कृपा ...
हे प्रभु !
प्रत्येक रस का स्वाद
देख लिया ,
यदि कुछ शेष है
तो तुम्हारी
भक्ति का स्वाद
शेष है .
किन्तु , यह आहार
सरल नहीं है प्राप्त
करना ,
जब तक न हो
कृपा आपकी .
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
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