हे प्रभु !
आपका आभास, आपकी निकटता
उन सभी असंभव कृत्यों में देख सका
जो आपने मुझसे कराये।
अन्यथा अशक्त और असहाय होकर
जीवन का भार उठाना
मेरे लिए कब संभव था ?
कब संभव था संसार की नदी में
गोता लगाना
यदि न होता आपका आशीष मेरे साथ।
जो ... शेष बचा है
उसमें भी आपकी भूमिका
अपेक्षित है
प्रार्थित है
हे प्रभु! हे प्रभु !!