Tuesday, 27 May 2014

आपकी भूमिका ...

हे प्रभु !

आपका आभास, आपकी निकटता 
उन सभी  असंभव कृत्यों में देख सका 
जो आपने मुझसे कराये।  

अन्यथा अशक्त और असहाय होकर 
जीवन का भार उठाना 
मेरे लिए कब संभव था ?

कब संभव था संसार की नदी में 
गोता  लगाना 
यदि न होता आपका आशीष मेरे साथ। 

जो ... शेष बचा है 
उसमें भी आपकी भूमिका 
अपेक्षित है 

प्रार्थित है

हे प्रभु! हे प्रभु !!

Wednesday, 21 May 2014

हे प्रभु ! आपकी पदचाप सुनाई देती है।





हे प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है। 

जब चिड़िया चहचहाती है 
जब नदिया गीत गाती है। 

जब फूल खिलखिलाते है ,
जब तारे जगमगाते  है। 

जब मैया चुंबन लेती है ,

प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है। 

जब वर्षा रिमझिम आती है 
जब सुबह जगमगाती  है। 

जब साँझ में  सूरज जाता है ,
जब दिन--रात बन जाता है। 

जब मुर्गी अंडों को सेती है ,

प्रभु !
आपकी पदचाप सुनाई देती है।