Saturday, 5 July 2014

अबोध बच्चे ...



हे प्रभु !


आपने ऊँगली को 

मेरे थामा -
इस विराट यात्रा में ,

किन्तु आप जब 

इधर जाते हो 
मैं तब उधर जाता हूँ ,

आप जब उधर 

जाते हो 
मैं तब इधर आता  हूँ ,

अर्थात जो मार्ग 

आपका है ,मैं- उस मार्ग के 
विपरीत जाता  हूँ 

कदाचित !

ऐसा ही करतें हैं सभी 
अबोध बच्चे 

हे प्रभु  हे प्रभु !!

Thursday, 3 July 2014

मैं...



हे प्रभु !

एक पत्ता नदी में 
बहने लगे 
तो क्या वह तैराक कहलाता है ?

एक तिनका आंधी में 
उड़ने लगे 
तो क्या वह उड़ाक कहलाता है ?

नहीं कदापि 
नहीं ,

तब, आप की कृपा से-
यदि मैँ सीख गया हूँ दो चार बातें 
करना ,

तब, कैसे मैं मान लूँ कि  
मैं विद्वान हूँ, मैं महान हूँ ?

हे प्रभु ! हे प्रभु !!

Tuesday, 1 July 2014

संरक्षक...



हे प्रभु !

भीड़ में  बच्चे गुम  
हो जाते हैं 

इसीलिये संरक्षक की 
ऊँगली पकड़ना होता है 
अनिवार्य,

तब, कृपया आप 
अन्यथा न लें -

जो नहीं छोड़ पा रहा मैं 
ऊँगली आपकी ,

हे प्रभु !  हे प्रभु !!