हे प्रभु !
आपने ऊँगली को
मेरे थामा -
इस विराट यात्रा में ,
किन्तु आप जब
इधर जाते हो
मैं तब उधर जाता हूँ ,
आप जब उधर
जाते हो
मैं तब इधर आता हूँ ,
अर्थात जो मार्ग
आपका है ,मैं- उस मार्ग के
विपरीत जाता हूँ
कदाचित !
ऐसा ही करतें हैं सभी
अबोध बच्चे
हे प्रभु हे प्रभु !!
हे प्रभु !
एक पत्ता नदी में
बहने लगे
तो क्या वह तैराक कहलाता है ?
एक तिनका आंधी में
उड़ने लगे
तो क्या वह उड़ाक कहलाता है ?
नहीं कदापि
नहीं ,
तब, आप की कृपा से-
यदि मैँ सीख गया हूँ दो चार बातें
करना ,
तब, कैसे मैं मान लूँ कि
मैं विद्वान हूँ, मैं महान हूँ ?
हे प्रभु ! हे प्रभु !!
हे प्रभु !
भीड़ में बच्चे गुम
हो जाते हैं
इसीलिये संरक्षक की
ऊँगली पकड़ना होता है
अनिवार्य,
तब, कृपया आप
अन्यथा न लें -
जो नहीं छोड़ पा रहा मैं
ऊँगली आपकी ,
हे प्रभु ! हे प्रभु !!